Available languages:
रवांडा में 1994 में तुत्सियों के ख़िलाफ़ हुए जनसंहार की वर्षगाँठ पर संदेश 7 अप्रैल 2020
6 Apr 2020 -  आज के दिन हम 1994 में रवांडा में तुत्सियों के ख़िलाफ़ हुए जनसंहार को याद कर रहे हैं – जब केवल 100 दिनों के भीतर ही दस लाख से ज़्यादा लोगों की हत्या कर दी गई थी.
जनसंहार का शिकार हुए ज़्यादातर लोग तुत्सी थे, लेकिन जिन हुतू और अन्य लोगों ने जनसंहार का विरोध किया, उन्हें भी मौत का शिकार होना पड़ा.
आज के दिन हम, उन्हें सम्मान के साथ याद करते हैं जिनकी हत्या कर दी गई थी.
और हम उन जीवित बचे लोगों की क्षमताओं से प्रेरणा हासिल करते हैं जिन्होंने सुलह-सफ़ाई और पुनर्निर्माण का रास्ता अपनाया.
हम इस तरह के अत्याचार फिर कभी नहीं होने दे सकते.
हमें नफ़रत भरी भाषा और ख़ुद से अलग समुदायों के ख़िलाफ़ ज़हर भरी भाषा को रोकना होगा, और ध्रुवीकरण, राष्ट्रवाद व संरक्षणवाद की ताक़तों को नकारना होगा.
हम सब एक मानव परिवार हैं और हम सभी एक ही ग्रह के वासी हैं - हम केवल इस स्वीकारोक्ति के साथ ही कोविड-19 से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के क़ाबिल हो सकते हैं.
जनसंहार के बाद से रवांडा ने दिखा दिया है कि ज़ख़्म भरने और एक ज़्यादा मज़बूत व टिकाऊ समाज का निर्माण करने के लिए तबाही की राख से किसतरह उबरा जाता है.
हम टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास जैसे-जैसे तेज़ कर रहे हैं, आइए, हम रवांडा द्वारा सीखे गए सबक़ से प्रेरणा हासिल करें.
Open Video Category
Conferences/Summits
Thumbnail 00:01:58
عربي 20 Oct 2020