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एंतोनियो गुटेरेश (यूएन महासचिव) बच्चों पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव के बारे में मीडिया के लिए टिप्पणी (न्यूयॉर्क, 16 अप्रैल 2020)
16 Apr 2020 -  कोविड – 19 महामारी दुनिया भर में फैलने के साथ-साथ हम एक भयावह चलन देख रहे हैं.
समाज के निर्धनतम और निर्बलतम लोगों पर बहुत ख़तरनाक प्रभाव पड़ा है, महामारी का और उससे निपटने के उपायों का भी.
मैं ख़ासतौर से, दुनिया भर के बच्चों के बारे में भी बहुत चिन्तित हूँ. शुक्र है कि ज़्यादातर बच्चे अभी इस बीमारी के बहुत गंभीर लक्षणों से बचे हुए हैं.
लेकिन उनकी ज़िन्दगियाँ पूरी तरह से उलट-पलट हो गई हैं.
मैं हर सभी जगह तमाम परिवारों से, और हर स्तर के लीडर्स से बच्चों की सुरक्षा करने की अपील करता हूँ.
आज, हम एक ऐसी रिपोर्ट जारी कर रहे हैं जो बच्चों के सामने दरपेश ख़तरों की तरफ़ ध्यान दिलाती है.
प्रथम, शिक्षा.
इस समय, लगभग सभी बच्चे स्कूलों से बाहर हैं. कुछ स्कूल दूरस्थ शिक्षण (Distance Learning) मुहैया करा रहे हैं, लेकिन ये भी सभी बच्चों को उपलब्ध नहीं है. धीमी और महंगी इंटरनेट सेवाओं वाले देशों में बच्चे ज़्यादा वंचित साबित हो रहे हैं.
दूसरा, भोजन
दुनिया भर में लगभग 31 करोड़ स्कूली बच्चे अपने नियमित दैनिक पोषण के स्रोत के लिए स्कूलों पर निर्भर हैं. ये संख्या दुनिया भर के कुल बच्चों की लगभग आधी है.
कोविड-19 से पहले भी दुनिया बच्चों के कुपोषण व विकास बाधिता संबंधी अस्वीकार्य उच्च दरों का सामना कर रही थी.
तीसरा, हिफ़ाज़त.
बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, उनके समुदाय लॉकडाउन में हैं और वैश्विक आर्थिक मंदी गहराती जा रही है, ऐसे में परिवारों में दबावों का स्तर बढ़ रहा है.
बच्चे घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार के पीड़ित और चश्मदीद गवाह दोनों ही बनने को मजबूर हैं.
स्कूल बन्द होने के कारण, ऐसी स्थिति में अहम अग्रिम चेतावनी प्रणाली ग़ायब है.
लड़कियों के स्कूलों से बाहर हो जाने का भी ख़तरा मंडरा रहा है, जिससे किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में बढ़ोत्तरी होगी.
और चूँकि बच्चे अब ज़्यादा समय ऑनलाइन पर गुज़ार रहे हैं, हम इस स्थिति से उत्पन्न ख़तरों को भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. है.
इससे बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण और बहकाने-फ़ुसलाने यानी ग्रूमिंग का शिकार हो सकते हैं.
दोस्तों और संगी-साथियों के साथ रूबरू मुलाक़ातें नहीं होने के कारण, जोखिम भरे हालात पैदा हो सकते हैं, मसलन वो यौन आधारित तस्वीरों का आदान प्रदान करने लगें.
साथ ही, ऑनलाइन पर ज़्यादा व बेतरतीब समय गुज़ारने के कारण बच्चे हानिकारक व हिंसक सामग्री की चपेट में आ सकते हैं और डराने-धमकाने (Cyber Bullying) का भी शिकार हो सकते हैं.
बच्चों को सुरक्षित रखने में सरकारों और अभिभावकों सभी की बहुत अहम भूमिका है.
बेहद कमज़ोर हालात वालों की हिफ़ाज़त करने की विशेष ज़िम्मेदारी सोशल मीडिया कंपनियों की भी है.
चौथा, स्वास्थ्य.
परिवारों की आय में कमी होने कारण उन्हें स्वास्थ्य और खाद्य पदार्थों की ज़रूरतों पर ख़र्च में भी कटौती करनी पड़ेगी, जिससे विशेष रूप से बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ ज़्यादा प्रभावित होंगे.
पोलियो वैक्सीन पिलाने के अभियान स्थगित कर दिए गए हैं.
ख़सरा के टीकाकरण अभियान भी 23 देशों में बन्द कर दिए गए हैं.
चूँकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बहुत बढ़ गया है, ऐसे में बीमार बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता कम हो गई है.
वैश्विक आर्थिक मन्दी तेज़ी पकड़ रही है, जिसके कारण 2020 के दौरान लाखों अतिरिक्त बच्चे मौत का शिकार हो सकते हैं.
आज जारी रिपोर्ट में पाए गए ये कुछ मुख्य बिन्दु हैं. इसका निष्कर्ष स्पष्ट है.
बच्चों के लिए दरपेश इन सभी जोखिमों पर हमें तत्काल कार्रवाई करनी होगी.
नेताओं को महामारी के प्रभाव से कुछ राहत दिलाने के लिए अपनी सम्पूर्ण क्षमतानुसार कार्रवाई करनी होगी.
एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा के रूप में शुरू हुई इस बीमारी ने दुनिया भर में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने के वैश्विक वादे को एक मुश्किल इम्तेहान में तब्दील कर दिया है.
ये रिपोर्ट तमाम सरकारों और दानदाताओं से सभी बच्चों की शिक्षा को वरीयता देने की पुकार लगाती है.
रिपोर्ट उनसे आर्थिक मदद की सिफ़ारिश भी करती है, जिसमें निम्न आय वाले परिवारों को नक़दी की उपलब्धता और बच्चों के लिए सामाजिक व स्वास्थ्य सेवाओं में अवरोधों को न्यूनतम करना शामिल है.
हमें सबसे कमज़ोर हालात वालों को प्राथमिकता पर रखना होगा – इनमें अशांति व संघर्ष के हालात में रहने वाले बच्चे, बाल शरणार्थी और विस्थापित लोग; और विकलांग बच्चे शामिल हैं.
अन्त में, कोविड-19 महामारी के क़हर से उबरने के प्रयासों में हमें बेहतर दुनिया का निर्माण करना होगा जो ज़्यादा टिकाऊ व समावेशी अर्थव्यवस्था और टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर आधारित समाजों वाली हो.
ऐसे में जबकि महामारी ने दुनिया भर के बहुत से बच्चों को जोखिम में डाल दिया है, मैं अपनी तात्कालिक अपील दोहराता हूँ: आइए, हम अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ज़िन्दगी बेहतर बनाने के लिए काम करें.
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