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एंतोनियो गुटेरेश (यूएन महासचिव) अंतरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस पर संदेश
20 Apr 2020 -  इस अंतरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस पर, सभी की निगाहें कोविड-19 वैश्विक महामारी पर टिकी हुई हैं – दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के सामने ये सबसे बड़ा इम्तेहान है.
ज़िन्दगियाँ बचाने, तकलीफ़ें कम करने और भीषण आर्थिक व सामाजिक नतीजों से बचने के लिए हम सभी को एकजुट होकर काम करना होगा.
कोरोनावायरस के प्रभाव तात्कालिक और बेहद ख़तरनाक दोनों ही हैं.
लेकिन एक और बहुत बड़ी आपदा है – पृथ्वी का प्रकट होता पर्यावरणीय संकट.
जैव विविधता बहुत तेज़ी से क्षय की राह पर है.
जलवायु अवरोध ऐसे मुक़ाम पर पहुँच चुका है जहाँ से वापसी संभव नहीं.
हमें अपने ग्रह को कोरोनावायरस और हमारे वजूद के लिए एक ख़तरा बन चुके जलवायु संकट दोनों से ही बचाने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी होगी.
मौजूदा संकट हमारी आँखें खोलने के लिए एक अभूतपूर्व अलार्म है.
हमें बचाव कार्यों को भविष्य के लिए सही काम करने के एक अवसर में तब्दील करना होगा.
इसलिए मैं बचाव कार्यों और भविष्य के कामों को आकार देने के लिए छह जलवायु संबंधी उपायों की पेशकश कर रहा हूँ.
पहला: चूँकि कोरोनावायरस से बचाव के उपायों में हम भारी धन ख़र्च कर रहे हैं, हमें नए कामकाज और कारोबार सृजन के लिए स्वच्छ व हरित बदलाव का सहारा लेना होगा.
दूसरा: जहाँ कारोबारों को उबारने के लिए करदाताओं का धन ख़र्च हो रहा है, वहाँ कामकाज को हरित अवसरों और टिकाऊ प्रगति से जोड़ना होगा.
तीसरा: वित्तीय अग्निशक्ति को धूसर से हरित अर्थव्यवस्था की तरफ़ मोड़ना होगा, और समाजों व लोगों को ज़्यादा परिवर्तनशील बनाना होगा.
चौथा: सार्वजनिक धन भविष्य में निवेश करने के लिए ख़र्च होगा, ना कि अतीत में, और पर्वायरण व जलवायु की सहायता करने वाले टिकाऊ क्षेत्रों व परियोजनाओं को बढ़ावा देने में.
जीवाष्म ईंधन के लिए वित्तीय मदद बन्द हो, और प्रदूषण फैलाने वालों को हर्जाना भरना शुरू करना होगा.
पाँचवाँ: जलवायु जोखिम और अवसरों को वित्तीय प्रणालियों और सार्वजनिक नीति निर्माण व बुनियादी ढाँचे के सभी पहलुओं में शामिल करना होगा.
छठा: एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में हम सब को एकजुट होकर काम करना होगा.
ये छह सिद्धान्त एकजुटता के सहारे बचाव के लिए अहम रास्ता दिखाते हैं.
ग्रीनहाउस गैसें, बिल्कुल वायरस की ही तरह, राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं पहचानतीं.
इस पृथ्वी दिवस पर, तमाम लोगों और पृथ्वी, दोनों ही के लिए, आइए, एक स्वस्थ व सहनशील भविष्य की माँग में, मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाइए.