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एंतोनियो गुटेरेश ( महासचिव ) अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के लिये वीडियो सन्देश 2021
5 Mar 2021 -  कोविड-19 महामारी ने लैंगिक समानता के क्षेत्र में दशकों की प्रगति को मिटा दिया है.
बड़े पैमाने पर रोज़गार ख़त्म होने से लेकर, बिना आय वाली देखभाल करने की ज़िम्मेदारी, बच्चों की स्कूली शिक्षा बाधित होने से लेकर, घरेलू हिंसा और शोषण के बढ़ते संकट तक, महिलाओं की ज़िन्दगियाँ उलट- पलट हो गई हैं, और उनके अधिकार कमज़ोर पड़े हैं.
माताओं - ख़ासतौर पर एकल माताओं को – गम्भीर चिन्ता और व्यग्रता व बेहद कठिन हालात से दो-चार होना पड़ा है.
इसके प्रभाव, महामारी ख़त्म होने के बाद भी लम्बे समय तक रहेंगे.
लेकिन, महिलाएँ महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में, अग्रिम मोर्चों पर भी मुस्तैद रही हैं.
महिलाएँ, ऐसे अनिवार्य कार्यबल का हिस्सा भी रही हैं जिन्होंने लोगों को जीवित रखने, अर्थव्यवस्थाओं को थामे रखने, समुदायों और परिवारों को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई है.
महिलाएँ, ऐसे नेतृत्वकर्ताओं में शामिल रही हैं जिन्होंने घटना दर को नीचे रखा है, और देशों को पुनर्बहाली की तरफ़ रास्ते पर टिकाए रखा है.
इस वर्ष का अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस, महिलाओं की समान भागीदारी की रूपान्तरकारी शक्ति को रेखांकित करता है.
हम संयुक्त राष्ट्र में, ख़ुद इसके गवाह हैं, जहाँ मुझे ये देखकर गर्व है कि हमने यूएन नेतृत्व पदों पर, लैंगिक समानता हासिल कर ली है, जोकि इतिहास में पहली बार हुआ है.
प्रमाण स्पष्ट है.
महिलाएँ जब सरकार में नेतृत्व करती हैं, तो हम सामाजिक संरक्षा में अधिक निवेश और निर्धनता के विरुद्ध बड़ी पैठ देखते हैं.
महिलाएँ जब संसद में होती हैं तो, देश ज़्यादा कड़ी जलवायु नीतियाँ अपनाते हैं.
महिलाएँ जब शान्ति वार्ता में शिरकत करती हैं, तो समझौते ज़्यादा टिकाऊ होते हैं.
और अब, जबकि संयुक्त राष्ट्र में भी महिलाएँ, शीर्ष नेतृत्व पदों पर, समान रूप से काम कर रही हैं, तो हम शान्ति बहाली, टिकाऊ विकास और मानवाधिकारों में और भी ज़्यादा ठोस कार्रवाइयाँ देख रहे हैं.
एक पुरुष प्रधान दुनिया, जहाँ पुरुष के आधिपत्य वाली संस्कृति है, वहाँ लैंगिक समानता, निश्चित रूप से सत्ता का एक प्रश्न है.
पुरुष भी, समाधान का एक अनिवार्य हिस्सा हैं.
मैं तमाम देशों, कम्पनियों और संस्थानों का आहवान करता हूँ कि वो महिलाओं की समान भागीदारी बढ़ाने और तीव्र गति से बदलाव लाने के लिये, विशेष उपाय व हिस्सेदारी निर्धारित करें.
हम जैसे-जैसे महामारी से उबर रहे हैं, आर्थिक सहायता पैकेजों में, महिलाओं और लड़कियों पर ख़ास ध्यान देना होगा, जिसमें, महिलाओं के स्वामित्व वाले कारोबारों और देखभाल वाली अर्थव्यवस्था में ज़्यादा संसाधन निवेश करना शामिल है.
महामारी से उबरने के प्रयासों में हमारे पास, पीढ़ियों से चले आ रहे बहिष्करण और असमानताओं को, पीछे छोड़ देने का अवसर मौजूद है.
चाहे देश चलाना हो, कारोबार या फिर कोई लोकप्रिय आन्दोलन, महिलाएँ ठोस नतीजों वाले योगदान कर रही हैं, और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को आगे बढ़ा रही हैं.
अब समय है – समानता वाला भविष्य बनाने का. ये हर किसी के लिये एक कार्य है – और हर एक के हित के लिये भी.
धन्यवाद.
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